Bhool Chuk Maaf: एक समय-चक्र में फंसी अधूरी कहानी

Bhool Chuk Maaf: एक समय-चक्र में फंसी अधूरी कहानी


 राजकुमार राव और वामीका गब्बी अभिनीत "Bhool Chuk Maaf" एक रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म है, जो समय-चक्र (टाइम-लूप) की अवधारणा पर आधारित है। हालांकि, फिल्म की कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को पूरी तरह से बांधने में असफल रही है।


🧭 कहानी की झलक

फिल्म की कहानी बनारस के युवक रंजन तिवारी (राजकुमार राव) की है, जो सरकारी नौकरी पाने के बाद अपनी प्रेमिका तितली (वामीका गब्बी) से विवाह करना चाहता है। हालांकि, शादी से ठीक पहले रंजन एक रहस्यमय समय-चक्र में फंस जाता है, जहाँ वह बार-बार अपने हल्दी समारोह के दिन को जीता है। इस चक्र से बाहर निकलने के लिए उसे यह समझना होगा कि वह कहाँ गलती कर रहा है और उसे क्या सुधारना है।


🎭 अभिनय और निर्देशन

राजकुमार राव ने एक बार फिर छोटे शहर के युवक की भूमिका निभाई है, लेकिन इस बार उनके किरदार में नवीनता की कमी महसूस होती है। वामीका गब्बी ने तितली के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उनकी भूमिका को और गहराई दी जा सकती थी। सहायक कलाकारों में सीमा पाहवा, संजय मिश्रा, रघुबीर यादव और इश्तियाक़ ख़ान ने अपने-अपने किरदारों में जान डालने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर पटकथा के कारण उनका प्रभाव सीमित रह गया है


🎥 तकनीकी पक्ष और संगीत

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी बनारस की गलियों और घाटों की सुंदरता को दर्शाती है, लेकिन कहानी की असंगतता के कारण यह प्रभावी नहीं हो पाती। संगीत पक्ष में भी फिल्म कमजोर रही है; "चोर बाज़ारी" गाने का रीमिक्स संस्करण दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाया।




🧩 समस्या और निष्कर्ष

"Bhool Chuk Maaf" की सबसे बड़ी समस्या इसकी पटकथा है, जो समय-चक्र की अवधारणा को ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाती। फिल्म का हास्य भी मजबूर और दोहरावपूर्ण लगता है, जिससे दर्शकों को हँसी कम और ऊब अधिक होती है। कुल मिलाकर, यह फिल्म एक अच्छी अवधारणा को सही तरीके से प्रस्तुत करने में विफल रही है।


रेटिंग: 2/5

यदि आप राजकुमार राव और वामीका गब्बी के प्रशंसक हैं या समय-चक्र आधारित कहानियों में रुचि रखते हैं, तो "Bhool Chuk Maaf" एक बार देखने लायक हो सकती है। हालांकि, यदि आप एक मजबूत कहानी और प्रभावी हास्य की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सकती।


स्रोत: NDTV समीक्षा

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